➤ नाबालिग छात्राओं से छेड़छाड़ के दोषी शिक्षक को 10 साल की कठोर कैद
➤ नवोदय विद्यालय में तैनात शिक्षक ने 12 छात्राओं के साथ की थीं अश्लील हरकतें
➤ पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया सख्त फैसला, 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
हिमाचल प्रदेश के रामपुर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो कोर्ट) ने नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों के एक गंभीर मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी शिक्षक को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 12 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में अनुशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल के अनुसार दोषी की पहचान रविकांत (46) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी क्षेत्र का निवासी है। आरोपी रामपुर स्थित नवोदय विद्यालय में कला शिक्षक के पद पर कार्यरत था। वर्ष 2024 के दौरान उसने विद्यालय में पढ़ने वाली कई नाबालिग छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार और अश्लील हरकतें की थीं।
जांच और अदालती कार्यवाही के दौरान सामने आया कि आरोपी ने एक-दो नहीं बल्कि कुल 12 छात्राओं के साथ अलग-अलग अवसरों पर अनुचित व्यवहार किया। छात्राओं ने बताया कि शिक्षक उन्हें गलत तरीके से छूता था और उनके साथ अशोभनीय हरकतें करता था। लंबे समय तक डर और दबाव में रहने के बाद छात्राओं ने साहस दिखाते हुए विद्यालय की काउंसलिंग शिक्षिका को पूरी घटना की जानकारी दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत पैरवी की। सरकार की ओर से उप जिला न्यायवादी कमल चंदेल ने मामले को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ 25 गवाहों के बयान और विभिन्न दस्तावेजी तथा वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। वहीं बचाव पक्ष केवल एक गवाह पेश कर पाया।
सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया और कड़ी सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत 7 वर्ष के कठोर कारावास और 7 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(2) के तहत 3 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया।
अदालत ने दोनों सजाओं को क्रमिक रूप से चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते आरोपी को कुल 10 वर्ष जेल में बिताने होंगे। इस फैसले का सामाजिक संगठनों, अभिभावकों और बाल अधिकारों से जुड़े लोगों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला शिक्षा संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक सशक्त संदेश है।



